Top 100 Best Short Chanakya Neeti in hindi

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Short Chanakya Neeti in hindi

Quote 1:
ज्ञान से राजा अपनी आत्मा का परिष्कार करता है, सम्पादन करता है।

Quote 2:
आत्मविजयी सभी प्रकार की संपत्ति एकत्र करने में समर्थ होता है।

Quote 3:
शासक को स्वयं योगय बनकर योगय प्रशासकों की सहायता से शासन करना चाहिए।

Quote 4:
योग्य सहायकों के बिना निर्णय करना बड़ा कठिन होता है।

Quote 5:
एक अकेला पहिया नहीं चला करता।

Quote 6:
कल के मोर से आज का कबूतर भला। अर्थात संतोष सब बड़ा धन है।

Quote 7:
आग सिर में स्थापित करने पर भी जलाती है। अर्थात दुष्ट व्यक्ति का कितना भी सम्मान कर लें, वह सदा दुःख ही देता है।

Quote 8:
अन्न के सिवाय कोई दूसरा धन नहीं है।

Quote 9:
भूख के समान कोई दूसरा शत्रु नहीं है।

Quote 10:
विद्या ही निर्धन का धन है।

Quote 11:
विद्या को चोर भी नहीं चुरा सकता।

Quote 12:
दूध के लिए हथिनी पालने की जरुरत नहीं होती। अर्थात आवश्कयता के अनुसार साधन जुटाने चाहिए।

Quote 13:
कठिन समय के लिए धन की रक्षा करनी चाहिए।

Quote 14:
कल का कार्य आज ही कर ले।

Quote 15:
सुख का आधार धर्म है।

Quote 16:
धर्म का आधार अर्थ अर्थात धन है।

Quote 17:
मित्रों के संग्रह से बल प्राप्त होता है।

Quote 18:
जो धैर्यवान नहीं है, उसका न वर्तमान है न भविष्य।

Quote 19:
संकट में बुद्धि ही काम आती है।

Quote 20:
लोहे को लोहे से ही काटना चाहिए।

Quote 21:
यदि माता दुष्ट है तो उसे भी त्याग देना चाहिए।

Quote 22:
यदि स्वयं के हाथ में विष फ़ैल रहा है तो उसे काट देना चाहिए।

Quote 23:
सांप को दूध पिलाने से विष ही बढ़ता है, न की अमृत।

Quote 24:
एक बिगड़ैल गाय सौ कुत्तों से ज्यादा श्रेष्ठ है। अर्थात एक विपरीत स्वाभाव
का परम हितैषी व्यक्ति, उन सौ लोगों से श्रेष्ठ है जो आपकी चापलूसी करते
है।

Quote 25:
जहां लक्ष्मी (धन) का निवास होता है, वहां सहज ही सुख-सम्पदा आ जुड़ती है।

Quote 26:
इन्द्रियों पर विजय का आधार विनर्मता है।

Quote 27:
प्रकर्ति का कोप सभी कोपों से बड़ा होता है।

Quote 28:
शत्रु के गुण को भी ग्रहण करना चाहिए।

Quote 29:
सुख और दुःख में सामान रूप से सहायक होना चाहिए।

Quote 30:
ऋण, शत्रु और रोग को समाप्त कर देना चाहिए।

Quote 31:
स्वभाव का अतिक्रमण अत्यंत कठिन है।

Quote 32:
अर्थ का आधार राज्य है।

Quote 33:
वन की अग्नि चन्दन की लकड़ी को भी जला देती है अर्थात दुष्ट व्यक्ति किसी का भी अहित कर सकते है।

Quote 34:
शत्रु की दुर्बलता जानने तक उसे अपना मित्र बनाए रखें।

Quote 35:
सिंह भूखा होने पर भी तिनका नहीं खाता।

Quote 36:
एक ही देश के दो शत्रु परस्पर मित्र होते है।

Quote 37:
आपातकाल में स्नेह करने वाला ही मित्र होता है।

Quote 38:
अपने स्थान पर बने रहने से ही मनुष्य पूजा जाता है।

Quote 39:
सभी प्रकार के भय से बदनामी का भय सबसे बड़ा होता है।

Quote 40:
धूर्त व्यक्ति अपने स्वार्थ के लिए दूसरों की सेवा करते हैं।

Quote 41:
कल की हज़ार कौड़ियों से आज की एक कौड़ी भली। अर्थात संतोष सबसे बड़ा धन है।

Quote 42:
दुष्ट स्त्री बुद्धिमान व्यक्ति के शरीर को भी निर्बल बना देती है।

Quote 43:
आग में आग नहीं डालनी चाहिए। अर्थात क्रोधी व्यक्ति को अधिक क्रोध नहीं दिलाना चाहिए।

Quote 44:
मनुष्य की वाणी ही विष और अमृत की खान है।

Quote 45:
दुष्ट की मित्रता से शत्रु की मित्रता अच्छी होती है।

Quote 47:
भाग्य पुरुषार्थी के पीछे चलता है।

Quote 48:
अर्थ, धर्म और कर्म का आधार है।

Quote 49:
शत्रु दण्डनीति के ही योग्य है।

Quote 50:
कठोर वाणी अग्निदाह से भी अधिक तीव्र दुःख पहुंचाती है।

Quote 51:
व्यसनी व्यक्ति कभी सफल नहीं हो सकता।

Quote 52:
शक्तिशाली शत्रु को कमजोर समझकर ही उस पर आक्रमण करे।

Quote 53:
अपने से अधिक शक्तिशाली और समान बल वाले से शत्रुता न करे।

Quote 54:
मंत्रणा को गुप्त रखने से ही कार्य सिद्ध होता है।

Quote 55:
योग्य सहायकों के बिना निर्णय करना बड़ा कठिन होता है।

Quote 56:
एक अकेला पहिया नहीं चला करता।

Quote 57:
अविनीत स्वामी के होने से तो स्वामी का न होना अच्छा है।

Quote 58:
जिसकी आत्मा संयमित होती है, वही आत्मविजयी होता है।

Quote 59:
राज्य का आधार अपनी इन्द्रियों पर विजय पाना है।

Quote 60:
समय का ध्यान नहीं रखने वाला व्यक्ति अपने जीवन में निर्विघ्न नहीं रहता।

Quote 61:
प्रकृति (सहज) रूप से प्रजा के संपन्न होने से नेताविहीन राज्य भी संचालित होता रहता है।

Quote 62:
स्वाभिमानी व्यक्ति प्रतिकूल विचारों कोसम्मुख रखकर दुबारा उन पर विचार करे।

Quote 63:
अविनीत व्यक्ति को स्नेही होने पर भी मंत्रणा में नहीं रखना चाहिए।

Quote 64:
वृद्धजन की सेवा ही विनय का आधार है।

Quote 65:
वृद्ध सेवा अर्थात ज्ञानियों की सेवा से ही ज्ञान प्राप्त होता है।

Quote 66:
समस्त कार्य पूर्व मंत्रणा से करने चाहिए।

Quote 67:
मंत्रणा रूप आँखों से शत्रु के छिद्रों अर्थात उसकी कमजोरियों को देखा-परखा जाता है।

Quote 68:
राजा, गुप्तचर और मंत्री तीनो का एक मत होना किसी भी मंत्रणा की सफलता है।

Quote 69:
कार्य-अकार्य के तत्वदर्शी ही मंत्री होने चाहिए।

Quote 70:
छः कानो में पड़ने से (तीसरे व्यक्ति को पता पड़ने से) मंत्रणा का भेद खुल जाता है।

Quote 71:
विचार अथवा मंत्रणा को गुप्त न रखने पर कार्य नष्ट हो जाता है।

Quote 72:
भविष्य के अन्धकार में छिपे कार्य के लिए श्रेष्ठ मंत्रणा दीपक के समान प्रकाश देने वाली है।

Quote 73:
आलसी राजा अपने विवेक की रक्षा नहीं कर सकता।

Quote 74:
आलसी राजा की प्रशंसा उसके सेवक भी नहीं करते।

Quote 75:
शक्तिशाली राजा लाभ को प्राप्त करने का प्रयत्न करता है।

Quote 76:
राज्यतंत्र को ही नीतिशास्त्र कहते है।

Quote 77:
राज्यतंत्र से संबंधित घरेलु और बाह्य, दोनों कर्तव्यों को राजतंत्र का अंग कहा जाता है।

Quote 78:
मंत्रणा के समय कर्त्तव्य पालन में कभी ईर्ष्या नहीं करनी चाहिए।

Quote 79:
शासक को स्वयं योग्य बनकर योग्य प्रशासकों की सहायता से शासन करना चाहिए।

Quote 80:
सुख और दुःख में समान रूप से सहायक होना चाहिए।

Quote 81:
स्वाभिमानी व्यक्ति प्रतिकूल विचारों को सम्मुख रखकर दोबारा उन पर विचार करे।

Quote 82:
अविनीत व्यक्ति को स्नेही होने पर भी अपनी मंत्रणा में नहीं रखना चाहिए।

Quote 83:
ज्ञानी और छल-कपट से रहित शुद्ध मन वाले व्यक्ति को ही मंत्री बनाए।

Quote 84:
अप्राप्त लाभ आदि राज्यतंत्र के चार आधार है।

Quote 85:
आलसी राजा अप्राप्त लाभ को प्राप्त नहीं करता।

Quote 86:
आलसी राजा प्राप्त वास्तु की रक्षा करने में असमर्थ होता है।

Quote 87:
किसी लक्ष्य की सिद्धि में कभी शत्रु का साथ न करें।

Quote 88:
आलसी का न वर्तमान होता है, न भविष्य।

Quote 89:
सोने के साथ मिलकर चांदी भी सोने जैसी दिखाई पड़ती है अर्थात सत्संग का प्रभाव मनुष्य पर अवश्य पड़ता है।

Quote 90:
ढेकुली नीचे सिर झुकाकर ही कुँए से जल निकालती है। अर्थात कपटी या पापी व्यक्ति सदैव मधुर वचन बोलकर अपना काम निकालते है।

Quote 91:
सत्य भी यदि अनुचित है तो उसे नहीं कहना चाहिए।

Quote 92:
जो जिस कार्ये में कुशल हो उसे उसी कार्ये में लगना चाहिए।

Quote 93:
दोषहीन कार्यों का होना दुर्लभ होता है।

Quote 94:
किसी भी कार्य में पल भर का भी विलम्ब न करें।

Quote 95:
चंचल चित वाले के कार्य कभी समाप्त नहीं होते।

Quote 96:
पहले निश्चय करिएँ, फिर कार्य आरम्भ करें।

Quote 97:
राज्य नीति का संबंध केवल अपने राज्य को सम्रद्धि प्रदान करने वाले मामलो से होता है।

Quote 98:
लापरवाही अथवा आलस्य से भेद खुल जाता है।

Quote 99:
सभी मार्गों से मंत्रणा की रक्षा करनी चाहिए।

Quote 100:
मन्त्रणा की सम्पति से ही राज्य का विकास होता है।

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