Chanakya Quotes and Thoughts in Hindi

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Chanakya Quotes and Thoughts in Hindi

Chanakya Quotes and Thoughts in Hindi

Quote 1:
उपायों को जानने वाला कठिन कार्यों को भी सहज बना लेता है।

Quote 2:
सिद्ध हुए कार्ये का प्रकाशन करना ही उचित कर्तव्य होना चाहिए।

Quote 3:
संयोग से तो एक कीड़ा भी स्तिथि में परिवर्तन कर देता है।

Quote 4:
अज्ञानी व्यक्ति के कार्य को बहुत अधिक महत्तव नहीं देना चाहिए।

Quote 5:
भाग्य का शमन शांति से करना चाहिए।

Quote 6:
मनुष्य के कार्ये में आई विपति को कुशलता से ठीक करना चाहिए।

Quote 7:
मुर्ख लोग कार्यों के मध्य कठिनाई उत्पन्न होने पर दोष ही निकाला करते है।

Quote 8:
आत्मसम्मान के हनन से विकास का विनाश हो जाता है।

Quote 9:
ज्ञानियों के कार्य भी भाग्य तथा मनुष्यों के दोष से दूषित हो जाते है।

Quote 10:
निर्बल राजा की आज्ञा की भी अवहेलना कदापि नहीं करनी चाहिए।

Quote 11:
अग्नि में दुर्बलता नहीं होती।

Quote 12:
दंड का निर्धारण विवेकसम्मत होना चाहिए।

Quote 13:
दंडनीति से राजा की प्रवति अर्थात स्वभाव का पता चलता है।

Quote 14:
स्वभाव का मूल अर्थ लाभ होता है।

Quote 15:
अर्थ कार्य का आधार है।

Quote 16:
धन होने पर अल्प प्रयत्न करने से कार्य पूर्ण हो जाते है।

Quote 17:
उपाय से सभी कार्य पूर्ण हो जाते है। कोई कार्य कठिन नहीं रहता।

Quote 18:
बिना उपाय के किए गए कार्य प्रयत्न करने पर भी बचाए नहीं जा सकते, नष्ट हो जाते है।

Quote 19:
कार्य करने वाले के लिए उपाय सहायक होता है।

Quote 20:
कार्य का स्वरुप निर्धारित हो जाने के बाद वह कार्य लक्ष्य बन जाता है।

Quote 21:
अस्थिर मन वाले की सोच स्थिर नहीं रहती।

Quote 22:
कार्य के मध्य में अति विलम्ब और आलस्य उचित नहीं है।

Quote 23:
कार्य-सिद्धि के लिए हस्त-कौशल का उपयोग करना चाहिए।

Quote 24:
भाग्य के विपरीत होने पर अच्छा कर्म भी दुखदायी हो जाता है।

Quote 25:
अशुभ कार्यों को नहीं करना चाहिए।

Quote 26:
समय को समझने वाला कार्य सिद्ध करता है।

Quote 27:
समय का ज्ञान न रखने वाले राजा का कर्म समय के द्वारा ही नष्ट हो जाता है।

Quote 28:
निर्बल राजा को तत्काल संधि करनी चाहिए।

Quote 29:
पडोसी राज्यों से सन्धियां तथा पारस्परिक व्यवहार का आदान-प्रदान और संबंध विच्छेद आदि का निर्वाह मंत्रिमंडल करता है।

Quote 30:
शत्रु के प्रयत्नों की समीक्षा करते रहना चाहिए।

Quote 31:
बलवान से युद्ध करना हाथियों से पैदल सेना को लड़ाने के समान है।

Quote 32:
कच्चा पात्र कच्चे पात्र से टकराकर टूट जाता है।

Quote 33:
देश और फल का विचार करके कार्ये आरम्भ करें।

Quote 34:
नीतिवान पुरुष कार्य प्रारम्भ करने से पूर्व ही देश-काल की परीक्षा कर लेते है।

Quote 35:
परीक्षा करने से लक्ष्मी स्थिर रहती है।

Quote 36:
सभी प्रकार की सम्पति का सभी उपायों से संग्रह करना चाहिए।

Quote 37:
बिना विचार कार्ये करने वालो को भाग्यलक्ष्मी त्याग देती है।

Quote 38:
ज्ञान अर्थात अपने अनुभव और अनुमान के द्वारा कार्य की परीक्षा करें।

Quote 39:
संधि और एकता होने पर भी सतर्क रहे।

Quote 40:
शत्रुओं से अपने राज्य की पूर्ण रक्षा करें।

Quote 41:
शक्तिहीन को बलवान का आश्रय लेना चाहिए।

Quote 42:
दुर्बल के आश्रय से दुःख ही होता है।

Quote 43:
अग्नि के समान तेजस्वी जानकर ही किसी का सहारा लेना चाहिए।

Quote 44:
राजा के प्रतिकूल आचरण नहीं करना चाहिए।

Quote 45:
व्यक्ति को उट-पटांग अथवा गवार वेशभूषा धारण नहीं करनी चाहिए।

Quote 46:
देवता के चरित्र का अनुकरण नहीं करना चाहिए।

Quote 47:
ईर्ष्या करने वाले दो समान व्यक्तियों में विरोध पैदा कर देना चाहिए।

Quote 48:
चतुरंगणी सेना (हाथी, घोड़े, रथ और पैदल) होने पर भी इन्द्रियों के वश में रहने वाला राजा नष्ट हो जाता है।

Quote 49:
जुए में लिप्त रहने वाले के कार्य पूरे नहीं होते है।

Quote 50:
दंड से सम्पदा का आयोजन होता है।

Quote 51:
राज्य को नीतिशास्त्र के अनुसार चलना चाहिए।

Quote 52:
निकट के राज्य स्वभाव से शत्रु हो जाते है।

Quote 53:
किसी विशेष प्रयोजन के लिए ही शत्रु मित्र बनता है।

Quote 54:
आवाप अर्थात दूसरे राष्ट्र से संबंध नीति का परिपालन मंत्रिमंडल का कार्य है।

Quote 55:
दुर्बल के साथ संधि न करे।

Quote 56:
ठंडा लोहा लोहे से नहीं जुड़ता।

Quote 57:
संधि करने वालो में तेज़ ही संधि का हेतु होता है।

Quote 58:
दण्डनीति के प्रभावी न होने से मंत्रीगण भी बेलगाम होकर अप्रभावी हो जाते है।

Quote 59:
दंड का भय न होने से लोग अकार्य करने लगते है।

Quote 60:
दण्डनीति से आत्मरक्षा की जा सकती है।

Quote 61:
आत्मरक्षा से सबकी रक्षा होती है।

Quote 62:
शिकारपरस्त राजा धर्म और अर्थ दोनों को नष्ट कर लेता है।

Quote 63:
शराबी व्यक्ति का कोई कार्य पूरा नहीं होता है।

Quote 64:
कामी पुरुष कोई कार्य नहीं कर सकता।

Quote 65:
पूर्वाग्रह से ग्रसित दंड देना लोकनिंदा का कारण बनता है।

Quote 66:
धन का लालची श्रीविहीन हो जाता है।

Quote 67:
दण्डनीति के उचित प्रयोग से ही प्रजा की रक्षा संभव है।

Quote 68:
कार्य की सिद्धि के लिए उदारता नहीं बरतनी चाहिए।

Quote 69:
दूध पीने के लिए गाय का बछड़ा अपनी माँ के थनों पर प्रहार करता है।

Quote 70:
जिन्हें भाग्य पर विश्वास नहीं होता, उनके कार्य पुरे नहीं होते।

Quote 71:
प्रयत्न न करने से कार्य में विघ्न पड़ता है।

Quote 72:
जो अपने कर्तव्यों से बचते है, वे अपने आश्रितों परिजनों का भरण-पोषण नहीं कर पाते।

Quote 73:
जो अपने कर्म को नहीं पहचानता, वह अँधा है।

Quote 74:
प्रत्यक्ष और परोक्ष साधनों के अनुमान से कार्य की परीक्षा करें।

Quote 75:
निम्न अनुष्ठानों (भूमि, धन-व्यापार उधोग-धंधों) से आय के साधन भी बढ़ते है।

Quote 76:
राजा योग्य अर्थात उचित दंड देने वाला हो।

Quote 77:
अगम्भीर विद्वान को संसार में सम्मान नहीं मिलता।

Quote 78:
महाजन द्वारा अधिक धन संग्रह प्रजा को दुःख पहुँचाता है।

Quote 79:
अत्यधिक भार उठाने वाला व्यक्ति जल्दी थक जाता है।

Quote 80:
सभा के मध्य जो दूसरों के व्यक्तिगत दोष दिखाता है, वह स्वयं अपने दोष दिखाता है।

Quote 81:
विचार न करके कार्ये करने वाले व्यक्ति को लक्ष्मी त्याग देती है।

Quote 82:
परीक्षा किये बिना कार्य करने से कार्य विपत्ति में पड़ जाता है।

Quote 83:
परीक्षा करके विपत्ति को दूर करना चाहिए।

Quote 84:
अपनी शक्ति को जानकार ही कार्य करें।

Quote 85:
स्वजनों को तृप्त करके शेष भोजन से जो अपनी भूख शांत करता है, वाह अमृत भोजी कहलाता है।

Quote 86:
नीच व्यक्ति के सम्मुख रहस्य और अपने दिल की बात नहीं करनी चाहिए।

Quote 87:
कोमल स्वभाव वाला व्यक्ति अपने आश्रितों से भी अपमानित होता है।

Quote 88:
कठोर दंड से सभी लोग घृणा करते है।

Quote 89:
कायर व्यक्ति को कार्य की चिंता नहीं होती।

Quote 90:
अपने स्वामी के स्वभाव को जानकार ही आश्रित कर्मचारी कार्य करते है।

Quote 91:
गाय के स्वभाव को जानने वाला ही दूध का उपभोग करता है।

Quote 92:
चुगलखोर श्रोता के पुत्र और पत्नी उसे त्याग देते है।

Quote 93:
बच्चों की सार्थक बातें ग्रहण करनी चाहिए।

Quote 94:
साधारण दोष देखकर महान गुणों को त्याज्य नहीं समझना चाहिए।

Quote 95:
ज्ञानियों में भी दोष सुलभ है।

Quote 96:
रत्न कभी खंडित नहीं होता। अर्थात विद्वान व्यक्ति में कोई साधारण दोष होने पर उस पर ज्यादा ध्यान नहीं देना चाहिए।

Quote 97:
मर्यादाओं का उल्लंघन करने वाले का कभी विश्वास नहीं करना चाहिए।

Quote 98:
शत्रु द्वारा किया गया स्नेहिल व्यवहार भी दोषयुक्त समझना चाहिए।

Quote 99:
सज्जन की राय का उल्लंघन न करें।

Quote 100:
गुणी व्यक्ति का आश्रय लेने से निर्गुणी भी गुणी हो जाता है।

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