Chanakya Niti in Hindi-Best Quotes for Status

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Chanakya Niti in Hindi

Quote 1: संसार की ्रत्येक वास्तु नाशवान है

Quote 2: भले लोग दूसरों के शरीर को भी अपना ही शरीर मानते है।

Quote 3: मांस खाना सभी के लिए अनुचित है।

Quote 4: ज्ञानी पुरुषों को संसार का भय नहीं होता।

Quote 5: आत्मा तो सभी की साक्षी है।

Quote 6: कूट साक्षी नहीं होना चाहिए।

Quote 7: झूठी गवाही देने वाला नरक में जाता है।

Quote 8: पक्ष अथवा विपक्ष में साक्षी देने वाला न तो किसी का भला करता है, न बुरा।

Quote 9: क्षमा करने वाला अपने सारे काम आसानी से कर लेता है।

Quote 10: साहसी लोगों को अपना कर्तव्य प्रिय होता है।

Quote 11: दोपहर बाद के कार्य को सुबह ही कर लें।

Quote 12: धर्म को व्यावहारिक होना चाहिए।

Quote 13: मनुष्य के चेहरे पर आए भावों को देवता भी छिपाने में अशक्त होते है।

Quote 14: चोर और राजकर्मचारियों से धन की रक्षा करनी चाहिए।

Quote 15: राजा के दर्शन न देने से प्रजा नष्ट हो जाती है।

Quote 16: राजा के दर्शन देने से प्रजा सुखी होती है।

Quote 17: अहिंसा धर्म का लक्षण है।

Quote 18: व्यक्ति के मन में क्या है, यह उसके व्यवहार से प्रकट हो जाता है।

Quote 19: पापी की आत्मा उसके पापों को प्रकट कर देती है।

Quote 20: प्रजाप्रिय राजा लोक-परलोक का सुख प्रकट करता है।

Quote 21: कीड़ों तथा मलमूत्र का घर यह शरीर पुण्य और पाप को भी जन्म देता है।

Quote 22: जन्म-मरण में दुःख ही है।

Quote 23: आशा के साथ धैर्य नहीं होता।

Quote 24: निर्धन होकर जीने से तो मर जाना अच्छा है।

Quote 25: आशा लज्जा को दूर कर देती है अर्थात मनुष्य को निर्लज्ज बना देती है।

Quote 26: आत्मस्तुति अर्थात अपनी प्रशंसा अपने ही मुख से नहीं करनी चाहिए।

Quote 27: दिन में स्वप्न नहीं देखने चाहिए।

Quote 28: दिन में सोने से आयु कम होती है।

Quote 29: धन के नशे में अंधा व्यक्ति हितकारी बातें नहीं सुनता और न अपने निकट किसी को देखता है।

Quote 30: श्रेष्ठ स्त्री के लिए पति ही परमेश्वर है।

Quote 31: पति का अनुगमन करना, इहलोक और परलोक दोनों का सुख प्राप्त करना है।

Quote 32: घर आए अतिथि का विधिपूर्वक पूजन करना चाहिए।

Quote 33: नित्य दूसरे को समभागी बनाए।

Quote 34: दिया गया दान कभी नष्ट नहीं होता।

Quote 35: लोभ द्वारा शत्रु को भी भ्रष्ट किया जा सकता है।

Quote 36: मृगतृष्णा जल के समान है।

Quote 37: विनयरहित व्यक्ति की ताना देना व्यर्थ है।

Quote 38: बुद्धिहीन व्यक्ति निकृष्ट साहित्य के प्रति मोहित होते है।

Quote 39: सत्संग से स्वर्ग में रहने का सुख मिलता है।

Quote 40: श्रेष्ठ व्यक्ति अपने समान ही दूसरों को मानता है।

Quote 41: रूप के अनुसार ही गुण होते है।

Quote 42: नीच लोगों की कृपा पर निर्भर होना व्यर्थ है।

Quote 43: बुद्धिमानों के शत्रु नहीं होते।

Quote 44: शत्रु की निंदा सभा के मध्य नहीं करनी चाहिए।

Quote 45: क्षमाशील व्यक्ति का तप बढ़ता रहता है।

Quote 46: बल प्रयोग के स्थान पर क्षमा करना अधिक प्रशंसनीय होता है।

Quote 47: मर्यादा का कभी उल्लंघन न करें।

Quote 48: विद्वान और प्रबुद्ध व्यक्ति समाज के रत्न है।

Quote 49: स्त्री रत्न से बढ़कर कोई दूसरा रत्न नहीं है।

Quote 50: रत्नों की प्राप्ति बहुत कठिन है। अर्थात श्रेष्ठ नर और नारियों की प्राप्ति अत्यंत दुर्लभ है।

Quote 51: शास्त्र का ज्ञान आलसी को नहीं हो सकता।

Quote 52: स्त्री के प्रति आसक्त रहने वाले पुरुष को न स्वर्ग मिलता है, न धर्म-कर्म।

Quote 53: स्त्री भी नपुंसक व्यक्ति का अपमान कर देती है।

Quote 54: फूलों की इच्छा रखने वाला सूखे पेड़ को नहीं सींचता।

Quote 55: बिना प्रयत्न किए धन प्राप्ति की इच्छा करना बालू में से तेल निकालने के समान है।

Quote 56: महान व्यक्तियों का उपहास नहीं करना चाहिए।

Quote 57: कार्य के लक्षण ही सफलता-असफलता के संकेत दे देते है।

Quote 58: नक्षत्रों द्वारा भी किसी कार्य के होने, न होने का पता चल जाता है।

Quote 59: अपने कार्य की शीघ्र सिद्धि चाहने वाला व्यक्ति नक्षत्रों की परीक्षा नहीं करता।

Quote 60: परिचय हो जाने के बाद दोष नहीं छिपाते।

Quote 61: स्वयं अशुद्ध व्यक्ति दूसरे से भी अशुद्धता की शंका करता है।

Quote 62: अपराध के अनुरूप ही दंड दें।

Quote 63: कथन के अनुसार ही उत्तर दें।

Quote 64: वैभव के अनुरूप ही आभूषण और वस्त्र धारण करें।

Quote 65: अपने कुल अर्थात वंश के अनुसार ही व्यवहार करें।

Quote 66: कार्य के अनुरूप प्रयत्न करें।

Quote 67: पात्र के अनुरूप दान दें।

Quote 68: उम्र के अनुरूप ही वेश धारण करें।

Quote 69: हर पल अपने प्रभुत्व को बनाए रखना ही कर्त्यव है।

Quote 70: नीच की विधाएँ पाप कर्मों का ही आयोजन करती है।

Quote 71: निकम्मे अथवा आलसी व्यक्ति को भूख का कष्ट झेलना पड़ता है।

Quote 72: भूखा व्यक्ति अखाद्य को भी खा जाता है।

Quote 73: इंद्रियों के अत्यधिक प्रयोग से बुढ़ापा आना शुरू हो जाता है।

Quote 74: संपन्न और दयालु स्वामी की ही नौकरी करनी चाहिए।

Quote 75: लोभी और कंजूस स्वामी से कुछ पाना जुगनू से आग प्राप्त करने के समान है।

Quote 76: विशेषज्ञ व्यक्ति को स्वामी का आश्रय ग्रहण करना चाहिए।

Quote 77: उचित समय पर सम्भोग (sex) सुख न मिलने से स्त्री बूढी हो जाती है।

Quote 78: नीच और उत्तम कुल के बीच में विवाह संबंध नहीं होने चाहिए।

Quote 79: न जाने योग्य जगहों पर जाने से आयु, यश और पुण्य क्षीण हो जाते है।

Quote 80: अधिक मैथुन (सेक्स) से पुरुष बूढ़ा हो जाता है।

Quote 81: अहंकार से बड़ा मनुष्य का कोई शत्रु नहीं।

Quote 82: सभा के मध्य शत्रु पर क्रोध न करें।

Quote 83: शत्रु की बुरी आदतों को सुनकर कानों को सुख मिलता है।

Quote 84: धनहीन की बुद्धि दिखाई नहीं देती।

Quote 85: निर्धन व्यक्ति की हितकारी बातों को भी कोई नहीं सुनता।

Quote 86: निर्धन व्यक्ति की पत्नी भी उसकी बात नहीं मानती।

Quote 87: शत्रु का पुत्र यदि मित्र है तो उसकी रक्षा करनी चाहिए।

Quote 88: शत्रु के छिद्र (दुर्बलता) पर ही प्रहार करना चाहिए।

Quote 89: अपनी कमजोरी का प्रकाशन न करें।

Quote 90: एक अंग का दोष भी पुरुष को दुखी करता है।

Quote 91: शत्रु छिद्र (कमजोरी) पर ही प्रहार करते है।

Quote 92: हाथ में आए शत्रु पर कभी विश्वास न करें।

Quote 93: स्वजनों की बुरी आदतों का समाधान करना चाहिए।

Quote 94: स्वजनों के अपमान से मनस्वी दुःखी होते है।

Quote 95: सदाचार से शत्रु पर विजय प्राप्त की जा सकती है।

Quote 96: विकृतिप्रिय लोग नीचता का व्यवहार करते है।

Quote 97: नीच व्यक्ति को उपदेश देना ठीक नहीं।

Quote 98: नीच लोगों पर विश्वास नहीं करना चाहिए।

Quote 99: भली प्रकार से पूजने पर भी दुर्जन पीड़ा पहुंचाता है।

Quote 100: कभी भी पुरुषार्थी का अपमान नहीं करना चाहिए।

Quote 101: क्षमाशील पुरुष को कभी दुःखी न करें।

Quote 102: क्षमा करने योग्य पुरुष को दुःखी न करें।

Quote 103: स्वामी द्वारा एकांत में कहे गए गुप्त रहस्यों को मुर्ख व्यक्ति प्रकट कर देते हैं।

Quote 104: अनुराग अर्थात प्रेम फल अथवा परिणाम से ज्ञात होता है।

Quote 105: ज्ञान ऐश्वर्य का फल है।

Quote 106: मुर्ख व्यक्ति दान देने में दुःख का अनुभव करता है।

Quote 107: बहुत से गुणों को एक ही दोष ग्रस लेता है।

Quote 108: महात्मा को पराए बल पर साहस नहीं करना चाहिए।

Quote 109: चरित्र का उल्लंघन कदापि नहीं करना चाहिए।

Quote 110: विश्वास की रक्षा प्राण से भी अधिक करनी चाहिए।

Quote 111: दूध में मिला जल भी दूध बन जाता है।

Quote 112: मृतिका पिंड (मिट्टी का ढेला) भी फूलों की सुगंध देता है। अर्थात सत्संग का प्रभाव मनुष्य पर अवशय पड़ता है जैसे जिस मिटटी में फूल खिलते है उस मिट्टी से भी फूलों की सुगंध आने लगती है।

Quote 113: मुर्ख व्यक्ति उपकार करने वाले का भी अपकार करता है। इसके विपरीत जो इसके विरुद्ध आचरण करता है, वह विद्वान कहलाता है।

Quote 114: मछेरा जल में प्रवेश करके ही कुछ पाता है।

Quote 115: राजा अपने बल-विक्रम से धनी होता है।

Quote 116: शत्रु भी उत्साही व्यक्ति के वश में हो जाता है।

Quote 117: उत्साहहीन व्यक्ति का भाग्य भी अंधकारमय हो जाता है।

Quote 118: पाप कर्म करने वाले को क्रोध और भय की चिंता नहीं होती।

Quote 119: अविश्वसनीय लोगों पर विश्वास नहीं करना चाहिए।

Quote 120: विष प्रत्येक स्तिथि में विष ही रहता है।

Quote 121: कार्य करते समय शत्रु का साथ नहीं करना चाहिए।

Quote 122: राजा की भलाई के लिए ही नीच का साथ करना चाहिए।

Quote 123: संबंधों का आधार उद्देश्य की पूर्ति के लिए होता है।

Quote 124: विवेकहीन व्यक्ति महान ऐश्वर्य पाने के बाद भी नष्ट हो जाते है।

Quote 125: धैर्यवान व्यक्ति अपने धैर्ये से रोगों को भी जीत लेता है।

Quote 126: गुणवान क्षुद्रता को त्याग देता है।

Quote 127: कमजोर शरीर में बढ़ने वाले रोग की उपेक्षा न करें।

Quote 128: शराबी के हाथ में थमें दूध को भी शराब ही समझा जाता है।

Quote 129: यदि न खाने योग्य भोजन से पेट में बदहजमी हो जाए तो ऐसा भोजन कभी नहीं करना चाहिए।

Quote 130: आवश्यकतानुसार कम भोजन करना ही स्वास्थ्य प्रदान करता है।

Quote 131: खाने योग्य भी अपथ्य होने पर नहीं खाना चाहिए।

Quote 132: दुष्ट के साथ नहीं रहना चाहिए।

Quote 133:रोग शत्रु से भी बड़ा है।

Quote 134: सामर्थ्य के अनुसार ही दान दें।

Quote 135: चालाक और लोभी बेकार में घनिष्ठता को बढ़ाते है।

Quote 136: लोभ बुद्धि पर छा जाता है, अर्थात बुद्धि को नष्ट कर देता है।

Quote 137: अपने तथा अन्य लोगों के बिगड़े कार्यों का स्वयं निरिक्षण करना चाहिए।

Quote 138: मूर्खों में साहस होता ही है। (यहाँ साहस का तात्पर्ये चोरी-चकारी, लूट-पाट, हत्या आदि से है )

Quote 139: मृत्यु भी धरम पर चलने वाले व्यक्ति की रक्षा करती है।

Quote 140: जहाँ पाप होता है, वहां धर्म का अपमान होता है।

Quote 141: लोक-व्यवहार में कुशल व्यक्ति ही बुद्धिमान है।

Quote 142: सज्जन को बुरा आचरण नहीं करना चाहिए।

Quote 143: विनाश का उपस्थित होना सहज प्रकर्ति से ही जाना जा सकता है।

Quote 144: अधर्म बुद्धि से आत्मविनाश की सुचना मिलती है।

Quote 145: धनवान व्यक्ति का सारा संसार सम्मान करता है।

Quote 146: धनविहीन महान राजा का संसार सम्मान नहीं करता।

Quote 147: दरिद्र मनुष्य का जीवन मृत्यु के समान है।

Quote 148: धनवान असुंदर व्यक्ति भी सुरुपवान कहलाता है।

Quote 149: याचक कंजूस-से-कंजूस धनवान को भी नहीं छोड़ते।

Quote 150: जितेन्द्रिय व्यक्ति को विषय-वासनाओं का भय नहीं सताता।

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