Job Fraud Kahani, Part time job Fraud Kahani, full time Job Fraud story, dhokha dhadi aur sachchai -Ek Sachchi Kahani

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चेतन घर से आया था दिल्ली अपने गांव के ही ऐसे ही यार दोस्त के यहाँ काम की तलाश में , उसके पास 5000 रूपये थे ,
चेतन को लगा था की जाते ही उसे काम मिल जायेगा, किन्तु ऐसा नहीं हुआ , 2000रूपये रूम का भाड़ा दे दिया था उसने ,
और अगले महीने भी उसे भाड़ा देना था ,
दिल्ली आये उसे कुल ४० दिन हो चुके थे , किन्तु काम के नाम पे मिला कुछ नहीं।
एक दो बार जरुर लेबर चौक पे जाके, घर लौट आया था , किन्तु किसी ने उसे काम नहीं दिया।
वो 15 अप्रैल को अपने रूम पे आ रहा था , की उसने देखा की दीवार पे पोस्टर लगा था की अनपढ़ से लेकर ग्रेजुएट तक
को काम , सैलरी 20000 से शुरुआत ,
चेतन ने अपने कीपैड वाले मोबाइल से नंबर नोट किया और ठीक अगले दिन १० बजे उसने वो नंबर डायल किआ।
एक प्यारी सी मधुर आवाज से बात हुई तो वह खुश हो गया सामने वाली शालिनी जो की लाइन पे थी वो उसी जॉब देने वाली कंपनी में काम करती थी। शालिनी ने उसे बताया दो फोटोग्राफ और 1000 रूपये लेके वह कल यहाँ चला आये। करोल बाग़ ऑफिस में। चेतन ठीक उसी वक़्त निकल गया. उधर शालिनी ने अपने बॉस को और सह कर्मियों को बताया की एक मुर्गा आ रहा है। शालिनी के ऑफिस के सभी लोग प्रसन्ना हो उठे।
शालिनी ने बताया की वो देहाती है। फिर इधर से चेतन जब उस करोल बाग़ ऑफिस पंहुचा तो उसे ऑफिस के नाम पे केवल एक दुकान के बराबर का कमरा दिखा। वो डरता डरता इधर उधर देख ही रहा था की उसी फ्रॉड करने वाली और लोगो को लूटने वाली ऑफिस के एक बन्दे ने उसके पास आकर कहा , जॉब के लिए आये हो क्या , चेतन ने हाँ कहा और फिर दोनों उसी ऑफिस गए। चेतन ने बड़े आत्मविश्वास के साथ कहा की शालिनी मैडम ने मुझे जॉब के लिए बुलाया है। इस पर लड़के के शालिनी मैम को अंदर से बुलाया। चेतन को पानी का एक गिलास ऑफर किये गया। उसे आवभगत देख कर अच्छा लग रहा था। चेतन के जैसे और भी लोग बैठे हुए थे। फिर चेतन से उसका आधार कार्ड माँगा गया और फिर एक 1000 रूपये और दो डॉक्युमनेट्स पे सिग्नेचर करने करवाके, उसे बोलै गया की कल आना ।

ये सब करवाई करने के बाद उसे कल आने के लिए बोलै गया। और फिर चेतन काम पाने के आस में ख़ुशी ख़ुशी चला आया , अब उसे विश्वास था की , कल से उसे काम मिलने वाला है ,

चेतन फिर आज सुबह सुबह अपने ढेले ढले कपडे पहने और शाम की बची २ रोटी नामक और सरसो के तेल से चुपड़ कर खाल ली २ गिलास पानी पिए और फिर जेब देखा , जिसमे 700 रूपये पड़े थे , करोल बाग़ के उस ऑफिस पहुंचकर वो थोड़ी देर तक इधर उधर टहलता रहा , क्यूंकि वो 8 बजकर 15 मिनट पे ही पहुंच चूका था , जबकि वो फ्रॉड गिरोह 9 बजे के बाद ही ऑफिस खोलते थे।

जब ऑफिस खुला तो वही लड़का आज फिर ऑफिस खोल रहा था जो उसे कल मिला था यहाँ बाहर , तो उस लड़के ने कहा की भैया सब आएंगे अभी नौ बजे के बाद , आप वैसे नौ बजकर तीस मिनट के बाद ही आना।

ठीक 9 बजकर 45 मिनट पे चेतन उस ऑफिस के अंदर था , चेतन को आज कोई जैसे पहचान ही नहीं रहा था , न ही शालिनी मैम ने उसे पहचाना। फिर भी वो कुछ नहीं बोलै , थोड़ी देर के बाद कुछ और लड़के उसी की तरह ही वह बैठे हुए थे किसी को भी किसी से बात नहीं करने की शाक्त हिदायत थी।
फिर जॉब और कंसल्टेंसी ने नाम पर सभी से 500 रूपये और लिए गए , किसी ने आना कानि की तो किसी ने पैसे न होने का बहाना लेकिन जॉब पाने के नाम पर सभी को पैसे देने पड़े।

फिर कुछ देर के बाद उन सभी लड़को को ट्रेनिंग के लिए भेज दिया गया। बेसमेंट में ट्रेनिंग के लिए एक टीचर पहले से वह मौजूद था , थोड़ी देर तक परिचय होने के बाद , उस टीचर ने उन सभी ५ से ७ लड़को को इंग्लिश पढ़ना प्रारम्भ किये। तो चेतन ने कहा की सर सब बोले थे की अनपढ़ भी जॉब कर सकता है फिर ये सब क्या है जॉब कबसे करना है। तो इस पर उस टीचर के रूप में मौजूद भेड़िये बोला की १ महीने की ट्रेनिंग के बाद आपकी सैलरी 20000 रूपये होगी तो क्या गलत है ,
ये सुनते ही चेतन के होश फाख्ते हो गए।

ठीक यही सिलसिला पुरे 20 दिन चला, और फिर ट्रेनिंग के नाम पर 500 रूपये सबसे लिए गए, इधर अपने गांव के लड़के से चेतन ने पाँव पढ़कर विनती करकर , नए जॉब का हवाला देकर 3000 रूपये उधर ले लिए। लेकिन खर्चे जायदा और पैसा कम , कैसा चलता गुजरा , ठीक 40 दिन बाद जब सभी की ट्रेनिंग चलती रही तो कुछ ने आवाज उठाया की सर रोज हमारे किसी के ३० रूपये तो किसी के 50 लगते हैं , कैसा चलेगा ऐसे। तो उस टीचर ने कुछ जवाब नहीं दिया , सभी ने सोचा की अब जाकर ऑफिस जाया जाये और वह आवाज उठाया जाये। ज अब सब के सब ऑफिस पहुंच गए तो देखा की वहाँ कोई भी उन्हें जान पेहचान का नहीं दिख रहा , न शालिनी मम न बिपुल सर। दरअसल कोई उन्हें मिलता भी कैसे , सारा स्टाफ शिफ्ट जो हुआ था नजफगढ़ ऑफिस में , तो इस पर एक लढके मोहित ने डेस्क पे बैठे मैडम से कहा की , मैडम वो हमारे साथ ऐसा हुआ है , अब हम किस्से मदद मांगे , और हमें कुछ बताया नहीं जा रहा है , हमारी हेल्प करो माम प्लीज,
ऐसा सुनते ही वो मैडम हाथ से इशारा करके रोका सबको फिर अंदर होक आयी , और ठीक २ मिनट बाद ही ही सबको बॉस के केबिन की तरफ इशारा किया , और सारे लड़के उधर चले गए उनमे चेतन भि एक था। सबको अंदर जाते ही एक कड़क स्वाभाव के लौंडे ने कहा , तो तुम सब को लगता है की तुम सब को जॉब अब मिल जाने का सही समय आ गया है। ऐसा क्या। देखो मेरे कुछ सवालो के जबाब दे दो तो मैं कल ही तुम सबकी नौकरी लगवा दे रहा हु , ओके , ऐसा कह के उसने अब सब की तरफ देख और इंग्लिश में पता नहीं क्या भौकने लगा , अब इस चूतिये बॉस को कौन सम्जहये की जो इंग्लिश हम लोगो को पिछले २० साल की उम्र में पढ़ाये जाने पे भी नहीं आया , वो साला , १ महीने में कैसे आ जायेगा ,
किसी के कुछ पल्ले नहीं पड़ा। फिर थोड़ी देर बाद उस हरामखोर बॉस ने आवाज लगा के कहा की गीतिका कम हियर , , उस डेस्क पर से दूध सी उजली शकल वाली वो मैडम दोबारा अंदर आयी , और सब को बहा जाने के लिए कहा , फिर बॉस ने कहा की इनको अगले बच में दाल दो , जब वो मैडम बहार आयी तो उसने कहा की सब को 3000 रूपये रजिस्ट्रेशन फी देनी होगी अगले बेच के लिए , उनमे से किसी के पास पैसे नहीं थे , अब ये सुनके चेतन फफक कर वही रो पड़ा। तो साथ की सभी लड़को ने उसे ढांढस बंधाया और सब एक साथ बहार निकल आये। थोड़ी देर तक वो आपस में डिसकुश करते रहे तो फिर १ लड़के ने कहा की अब वो कही और तरय करेगा फिरसे।

फिर सब निरष मुद्रा में अपने अपने अपने घर चले गए चेतन भी अब रोये जा रहा था। अपनी हालत देख के ,
चेतन करोल बाग़ से पैदल ही चलता हुआ आज़ादपुर आया अपने कमरे पर पैसा बचने के चक्कर में , और फिर औंधे मुँह सो गया , उसकी नींद ठीक 11 बजे खुली रात के जब माकन मालिक ने कमरे का दरवाजा खटखटाया , और चिल्लाते हुए बहार से पूछा की पिछले महीने का भी नहीं दिया किराया , पता नहीं कब देगा , के करता रहता हिअ चोरी चो* के , चेतन उसी मुद्रा में कमरे का दरवाजा खोल के बोलै मालिक कल आपको सारा हिसाब दे दूंगा। आपकी अत्यंत कृपा होगी। तो माकन मालिक चला गया। चेतन ने अपने बाल्टी से पानी अपने चहरे पर छींटे मरने लगा। जब उसकी नींद गायब हो गयी। तो सुने कुछ खाने के लिए देखा पर कुछ भी नहीं था , आता ख़तम था , चावल ख़तम था , दाल नहीं था , बिस्कुट नहीं था , न आलू और न कोई और सब्ज़ी , फिर एक लोटा पानी पीकर वो एक कागज़ पर लिखा रहा था
“” की अगर आपको ये कागज मिले तो कृपया करके मेरी मम्मी को बता देना की अब इस दुनिया में मैं नहीं लेकि मेरे बीमे की पूरी रकम मेरी माँ को मिलेगी , पुरे 20 लाख जो की मेरे सारे डॉक्युमेंट्स मेरे गांव में है। ( और फिर जो जो घटा था सब कुछ टूटे फूटे शब्दों में जैसे तेऐसे बयां किया ) धन्यवाद्। “”
चेतन ने एक और पर्ची(चिठ्ठी ) ठीक ऐसे ही लिखी और फिर वो एक पर्ची अपने पैंट के जेब में रख लिखा कीपैड वाला मोबाइल भी उसने उसी जेब में रख लिया साथ ही आधार कार्ड भी, और एक पर्ची अपने बिस्तर पर ऐसा रखा की रूम का दरवाजा खोल के साथ ही सबसे पहले नज़र किसी की भी पर्ची पे ही पड़े।

फिर चेतन विजयी मुस्कान अपने चेहरे पे लाते हुए रेलवे ट्रैक की और बढ़ चला , रेलवे स्टेशन जायके उसने पता की सुबह की 4 से ६ बजे की कोई ट्रैन हैं क्या , तो इस पर उस स्टेशन मास्टर या जो कोई था उसने कहा आती है बाबू लेकिन वो यहाँ रूकती नहीं , सीखे नै दिली जेक रूकती है।

थैंक यू बोल के चेतन रेलवे ट्रैक की और चल पड़ा और फिर एक जगह जाकर बैठ गया , उसे वह बैठे हुए अभी कुछ देर ही हुए थे की कुछ बन्दे उसी की और आते दिखाई दिए। वो ठोस सहमा फिर उसने अपनी कीपैड वाली मोबाइल निकल कर के कुछ पथरो में निचे रख दिया , वो लोग जब सामने आये वो उसे देख के बोले साले ये हमारा इलाका है , जा यहाँ से , इतने में आके एक बन्दे में उसे दो चार थप्पड़ जड़ दिए , जब चेतन बार बार बार उनके पैरो पे गिरता रह तो उन पियक्कड़ों जो की मोबाइल और पैसे छीनने का काम करते थे उन्होंने चेतन को छोड़ दिया , मुँह से खून बह रहा था सर से भी खून बह रहा था चेतन के , और जैसे तैसे वह फिर से बैठा , उन उचक्कों में से जाते जाते एक ने पूछ ही लिया की यहाँ क्या कर रहा है। चेतन ने थर्राते और भूख से कापते जबान से कहा। मेरा कही घर नहीं इसीलिए यहाँ बैठा हु। फिर चेतन ने उसी के पाँव पकड़कर पूछा की भैया मुझे भी अपने गिरोह में शामिल कर लो , जो भी दोगे ले लूंगा। प्लीज भैया। तो इस पर उस उचक्के ने पूछा की इससे पहले की को मारा पिता है क्या , चेतन ने नहीं में जवाब दिया , तो इस पर उस उचक्के ने कहा चल बेहेन के लौ*
, साले कही और भाग जा , और बार बार उसके लफंगे के दोस्त उसे बुला रहे थे की अबे छोड़ उसे रबी भाई आजा।

अब चेतन अकेला बैठा था उसने इधर उधर धयान से देखा कोई दूर दूर तक नहीं था उसके आस पास , यु तो चेतन को भूतो से डर लगता था क्युकी उसने भूतो की चुड़ैलों की कहानिया सुन राखी थी , लेकिन आज उसे डर नहीं लग रहा था , उसे किसी साप बिछी , से भी आज खौफ नहीं था। उसने फिर से इधर उधर देखा और फिर कीपैड वाली अपनी मोबाइल उन पधरो के बीच से निकाली , टाइम देखा तो अभी 1 बजकर 45 मिनट ही हुए थे। , नींद उससे कोशो दूर थी। अब वो अपने माँ के बारे में सोचने लगा जो की घर पर अकेली होंगी , उसने मन में सोचकर देखा की कैसे उसके बीमे वाली राशि पाकर अम्मी बड़ी खुश हो जायेगीं। लेकिन चेतन के उस अकाल पे मानो पर्दा सा पद गया था , की जब वही नहीं रहेगा तो उसके मम्मी को करोडो मिल जाए तो किस काम की। इतने में १ पैसेंजर ट्रैन गुजरी और वह देखता रहा ,
चेतन के मन में बस उस फ़ास्ट ट्रैन का इंतजार था जिस के नीचे आके वो अपनी जान देगा। ताकि उसे मरने में तकलीफ न हो , देखते ही देखते सुबह के 4:35 हो गए और चेतन को दूर से आती किसी ट्रैन की हॉर्न सुनाई दी। चेतन एकदम उठ खड़ा हुआ उसने आस पास जज़र दौड़ाई पर कोई न था। उसे तसल्ली हुई , साथ ही उसे अब सामने से आती हुई कोई फ़ास्ट ट्रैन दिखाई दी वो झट से जाके पटरियों पर लेट गया , उसे परवाह न थी किसी चीज की, इसके बाद ट्रैन उससे टकराई और वो दूर जा गिरा लेकिन पटरियों के किनारे ही , इसके पहले वो फिर से पटरियों पे जा पाता की ट्रैन ने उसके दोनों पैरो को जो की ट्रैन के संपर्क में आ गए, को काटते हुए कब वह से गुज़र गयी उसे पता ही नहीं चला , उसके मुँह से भयानक दर्द वाली चीख निकली और आँखों के सामने अँधेरा छा गया.

उसकी नींद अस्पताल में ठीक ४ दिन बाद खुली , तो उसने अपने गांव वालो को सामने पाया , सिराहने उसकी माँ बैठी हुई बस रोये जा रही थि तो उन पर उसकी नजर न पड़ी, डॉक्टर ने किसी से भी उससे बात करने को मन किया था , वो अपने पैरों को मेहसुस ही नहीं कर प् रहा था। फिर कंपकपाती होंठो से बुदबुदाया , मैं जिन्दा हु , उसके गांव वालो ने कुछेक के सर हां में हिलाया, माँ हो बीमे का पैसा नहीं मिलेगा , सोचके उसकी आंखे दबदबा गई , गांव वाले पहले ही अशुओ की धाराएं बहा रहे थे , इतने में माँ की उसके कानो में आवाज पड़ी , मुझे मेरा लाल चाहिए , और कुछ नहीं भूखे पेट सो लुंगी , बस मेरा लल्ला सही सलामत रहे।

चेतन का मकान मालिक भी इधर आया हुआ था उसने सेब , केले और अनार भी लाये थे और उसने ३० हज़ार रूपये भी चेतन की माँ को दिया , और बोला , ” चेतन बीटा मन्ने पता न था की तू इतने कष्ट में था , वो तो सुबह सुबह तेरे रम का दरवाजा टाला न लगे होने पे , अंदर जाके देखा तो तुम्हारी वो चिठ्ठी सी हाथ आये ,माफ़ कर दे बेटे , ” .

20 दिन बाद सभी गांव चले गए, गांव वालो ने चेतन के लिए दिव्यांग वाले एक दुकान लगवा दी, और 2014 में चेतन की शादी हो गयी , चेतन को एक बेटी और एक बेटा है , चेतन की मम्मी और दुल्हन अच्छे से रहते हैं।

चेतन की इस आप बीती को सुनने के लिए आज भी मित्तूपुर चौराहे पर लोगों की भीड़ जुट जाती हैं।

होता यही है इन फ्रॉड और लूट मचने वाले गिरोह के साथ , ये पहले छोटे छोटे पम्पलेट और पर्चियों में जॉब पाओ के विज्ञापन देते हैं फिर लूटने का धंदा धीरे धीरे जोर पकड़ता है। इन लूटपड़ करने वाले गिरोहों का यही धंधा है , करोल बाग़, पटेल नगर, इन्दर पूरी, मायापुरी, राजौरी गार्डन , पंजाबी बाग़, जखीरा , नेहरू प्लेस, नजफगढ़, जी टी बी नगर, नाथुपुर , साउथ एक्स , जनकपुरी, वजीरपुर, आज़ादपुर, विश्वविद्यालय मंडी, आदर्श नगर, मंगोलपुरी, जहांगीरपुरी, ले लेकर पुरे दिल्ली में इनके जाल जो फैले हैं , ये पहले 30 दिन से लेके ५० दिन तक एक जगह लूटेंगे फिर , दूसरा लूटने वाला जथा दूसरे जगह से इस जगह आ जायेगा। और यही सिलसिला चलता रहता है। इसमें कहीं न कहीं राज्यों पुलिस भी शामिल होती है , यही नहीं हर राज्ये में यही पैटर्न चलता रहता है।

अगली बार आपको भी जब कोई ऑफर करे की जॉब पाए डाटा एंट्री जॉब , कॉपी पेस्ट जॉब , अनपढ़ से लेके पढ़े लिखो तक हो जॉब सैलरी 20000 से स्टार्टिंग ,
तब ये घटना जो की सच्ची है याद कर लेना ,
अगली बार दीवार पे कोई जॉब का पोस्टर देखना तो ये सच्ची घटना याद कर लेना
घर बैठे काम पाए , घर बैठे काम करे, घर बैठे ही कमाएं महीने के 400000 से 50000 तो कृपया जांच पड़ताल कर ले। जॉब के लिए प्राइवेट कंपनी में पैसा बिलकुल ही न दे।

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