Chanakya Niti in Hindi-Best For Fb Status and Suvichar in hindi-Single line Quotes

Chanakya Niti in Hindi-Best For Fb Status and Suvichar in hindi- Morning Suvichar for status set and sms send -Single line Quotes

Chanakya Niti in Hindi

मुर्ख लोगों का क्रोध उन्हीं का नाश करता है

सच्चे लोगो के लिए कुछ भी अ्राप्य नहीं।

केवल साहस से कार्य-सिद्धि संभव नहीं।

धर्मार्थ विरोधी कार्य करने वाला अशांति उत्पन्न करता है।

सीधे और सरल व्तक्ति दुर्लभता से मिलते है।

निकृष्ट उपायों से प्राप्त धन की अवहेलना करने वाला व्यक्ति ही साधू होता है।

जब कार्यों की अधिकता हो, तब उस कार्य को पहले करें, जिससे अधिक फल प्राप्त होता है।

अजीर्ण की स्थिति में भोजन दुःख पहुंचाता है।

मूर्खों से विवाद नहीं करना चाहिए।

मुर्ख से मूर्खों जैसी ही भाषा बोलें।

अकुलीन धनिक भी कुलीन से श्रेष्ठ है।

नीच व्यक्ति को अपमान का भय नहीं होता।

कुशल लोगों को रोजगार का भय नहीं होता।

कर्म करने वाले को मृत्यु का भय नहीं सताता।

साधू पुरुष किसी के भी धन को अपना ही मानते है।

दूसरे के धन अथवा वैभव का लालच नहीं करना चाहिए।

मृत व्यक्ति का औषधि से क्या प्रयोजन।

दूसरे के धन का लोभ नाश का कारण होता है।

दूसरे का धन किंचिद् भी नहीं चुराना चाहिए।

दूसरों के धन का अपहरण करने से स्वयं अपने ही धन का नाश हो जाता है।

चोर कर्म से बढ़कर कष्टदायक मृत्यु पाश भी नहीं है।

जीवन के लिए सत्तू (जौ का भुना हुआ आटा) भी काफी होता है।

पुष्पहीन होने पर सदा साथ रहने वाला भौरा वृक्ष को त्याग देता है।

विद्या से विद्वान की ख्याति होती है।

यश शरीर को नष्ट नहीं करता।

जो दूसरों की भलाई के लिए समर्पित है, वही सच्चा पुरुष है।

शास्त्रों के ज्ञान से इन्द्रियों को वश में किया जा सकता है।

गलत कार्यों में लगने वाले व्यक्ति को शास्त्रज्ञान ही रोक पाते है।

नीच व्यक्ति की शिक्षा की अवहेलना करनी चाहिए।

मलेच्छ अर्थात नीच की भाषा कभी शिक्षा नहीं देती।

मलेच्छ अर्थात नीच व्यक्ति की भी यदि कोई अच्छी बात हो अपना लेना चाहिए।

गुणों से ईर्ष्या नहीं करनी चाहिए।

शांत व्यक्ति सबको अपना बना लेता है।

बुरे व्यक्ति पर क्रोध करने से पूर्व अपने आप पर ही क्रोध करना चाहिए।

बुद्धिमान व्यक्ति को मुर्ख, मित्र, गुरु और अपने प्रियजनों से विवाद नहीं करना चाहिए।

ऐश्वर्य पैशाचिकता से अलग नहीं होता।

स्त्री में गंभीरता न होकर चंचलता होती है।

धनिक को शुभ कर्म करने में अधिक श्रम नहीं करना पड़ता।

वाहनों पर यात्रा करने वाले पैदल चलने का कष्ट नहीं करते।

जो व्यक्ति जिस कार्य में कुशल हो, उसे उसी कार्य में लगाना चाहिए।

स्त्री का निरिक्षण करने में आलस्य न करें।

स्त्री पर जरा भी विश्वास न करें।

सभी व्यक्तियों का आभूषण धर्म है।

पुत्र को सभी विद्याओं में क्रियाशील बनाना चाहिए।

जनपद के लिए ग्राम का त्याग कर देना चाहिए।

पुत्र के बिना स्वर्ग की प्राप्ति नहीं होती।

संतान को जन्म देने वाली स्त्री पत्नी कहलाती है।

एक ही गुरुकुल में पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं का निकट संपर्क ब्रह्मचर्य को नष्ट कर सकता है।

पुत्र प्राप्ति के लिए ही स्त्री का वरण किया जाता है।

पराए खेत में बीज न डाले। अर्थात पराई स्त्री से सम्भोग (सेक्स) न करें।

अपनी दासी को ग्रहण करना स्वयं को दास बना लेना है।

विनाश काल आने पर दवा की बात कोई नहीं सुनता।

देहधारी को सुख-दुःख की कोई कमी नहीं रहती।

गाय के पीछे चलते बछड़े के समान सुख-दुःख भी आदमी के साथ जीवन भर चलते है।

सज्जन तिल बराबर उपकार को भी पर्वत के समान बड़ा मानकर चलता है।

दुष्ट व्यक्ति पर उपकार नहीं करना चाहिए।

उपकार का बदला चुकाने के भय से दुष्ट व्यक्ति शत्रु बन जाता है।

सज्जन थोड़े-से उपकार के बदले बड़ा उपकार करने की इच्छा से सोता भी नहीं।

देवता का कभी अपमान न करें।

आंखों के समान कोई ज्योति नहीं।

आंखें ही देहधारियों की नेता है।

आँखों के बिना शरीर क्या है?

जल में मूत्र त्याग न करें।

नग्न होकर जल में प्रवेश न करें।

जैसा शरीर होता है वैसा ही ज्ञान होता है।

जैसी बुद्धि होती है , वैसा ही वैभव होता है।

स्त्री के बंधन से मोक्ष पाना अति दुर्लभ है।

सभी अशुभों का क्षेत्र स्त्री है।

स्त्रियों का मन क्षणिक रूप से स्थिर होता है।

तपस्वियों को सदैव पूजा करने योग्य मानना चाहिए।

पराई स्त्री के पास नहीं जाना चाहिए।

अन्न दान करने से भ्रूण हत्या (गर्भपात) के पाप से मुक्ति मिल जाती है।

वेद से बाहर कोई धर्म नहीं है।

धर्म का विरोध कभी न करें।

सत वाणी से स्वर्ग प्राप्त होता है।

सत्य से बढ़कर कोई तप नहीं।

सत्य से स्वर्ग की प्राप्ति होती है।

सत्य पर संसार टिका हुआ है।

सत्य पर ही देवताओं का आशीर्वाद बरसता है।

गुरुओं की आलोचना न करें।

दुष्टता नहीं अपनानी चाहिए।

झूठ से बड़ा कोई पाप नहीं।

दुष्ट व्यक्ति का कोई मित्र नहीं होता।

संसार में निर्धन व्यक्ति का आना उसे दुखी करता है।

दानवीर ही सबसे बड़ा वीर है।

सदाचार से मनुष्य का यश और आयु दोनों बढ़ती है।

अपने व्यवसाय में सफल नीच व्यक्ति को भी साझीदार नहीं बनाना चाहिए।

पुरुष के लिए कल्याण का मार्ग अपनाना ही उसके लिए जीवन-शक्ति है।

कठिन कार्य करवा लेने के उपरान्त भी नीच व्यक्ति कार्य करवाने वाले का अपमान ही करता है।

कृतघ्न अर्थात उपकार न मानने वाले व्यक्ति को नरक ही प्राप्त होता है।

उन्नति और अवनति वाणी के अधीन है।

पुराना होने पर भी शाल के वृक्ष से हाथी को नहीं बाँधा जा सकता।

बहुत बड़ा कनेर का वृक्ष भी मूसली बनाने के काम नहीं आता।

जुगनू कितना भी चमकीला हो, पर उससे आग का काम नहीं लिया जा सकता।

समृद्धता से कोई गुणवान नहीं हो जाता।

बिना प्रयत्न के जहां जल उपलब्ध हो, वही कृषि करनी चाहिए।

जैसा बीज होता है, वैसा ही फल होता है।

जैसी शिक्षा, वैसी बुद्धि।

जैसा कुल, वैसा आचरण।

रात्रि में नहीं घूमना चाहिए।

संसार में लोग जान-बूझकर अपराध की ओर प्रवर्त्त होते हैं।

शास्त्रों के न जानने पर श्रेष्ठ पुरुषों के आचरणों के अनुसार आचरण करें।

शास्त्र शिष्टाचार से बड़ा नहीं है।

राजा अपने गुप्तचरों द्वारा अपने राज्य में होने वाली दूर की घटनाओ को भी जान लेता है।

साधारण पुरुष परम्परा का अनुसरण करते है।

जिसके द्वारा जीवनयापन होता है, उसकी निंदा न करें।

इन्द्रियों को वश में करना ही तप का सार है।

स्त्री के बंधन से छूटना अथवा मोक्ष पाना अत्यंत कठिन है।

प्राणी अपनी देह को त्यागकर इंद्र का पद भी प्राप्त करना नहीं चाहता।

समस्त दुखों को नष्ट करने की औषधि मोक्ष है।

दुर्वचनों से कुल का नाश हो जाता है।

पुत्र के सुख से बढ़कर कोई दूसरा सुख नहीं है।

विवाद के समय धर्म के अनुसार कार्य करना चाहिए।

प्रातःकाल ही दिन-भर के कार्यों के बारें में विचार कर लें।

दुर्जन व्यक्तियों द्वारा संगृहीत सम्पति का उपभोग दुर्जन ही करते है।

नीम का फल कौए ही खाते है।

दैव (भाग्य) के अधीन किसी बात पर विचार न करें।

श्रेष्ठ और सुहृदय जन अपने आश्रित के दुःख को अपना ही दुःख समझते है।

राजसेवा में डरपोक और निकम्मे लोगों का कोई उपयोग नहीं होता।

लोक चरित्र को समझना सर्वज्ञता कहलाती है।

तत्त्वों का ज्ञान ही शास्त्र का प्रयोजन है।

कर्म करने से ही तत्त्वज्ञान को समझा जा सकता है।

धर्म से भी बड़ा व्यवहार है।

आत्मा व्यवहार की साक्षी है।

More like this : Quotes of Chanakya niti in Hindi

Leave a Comment

Your email address will not be published.