Best Chanakya Quotes In Hindi-आचार्य चाणक्य के सर्वश्रेष्ठ अनमोल विचार

Best Chanakya Quotes In Hindi
  • “स्वाभिमानी व्यक्ति ्रतिकूल विचारों को सम्मुख रखकर दुबारा उन पर विचार करें।” ~ आचार्य चाणक्य
  • “अविनीत व्यक्ति को स्नेही होने पर भी मंत्रणा में नहीं रखना चाहिए।” ~ आचार्य चाणक्य
  • “ज्ञानी और छल-कपट से रहित शुद्ध मन वाले व्यक्ति को ही मंत्री बनाएँ।” ~ आचार्य चाणक्य
  • “समस्त कार्य पूर्व मंत्रणा से करने चाहिएं।” ~ आचार्य चाणक्य

suvichar in hindi

  • “विचार अथवा मंत्रणा को गुप्त ना रखने पर कार्य नष्ट हो जाता है।” ~ आचार्य चाणक्य
  • “लापरवाही अथवा आलस्य से भेद खुल जाता है।” ~ आचार्य चाणक्य
  • “मन्त्रणा की संपत्ति से ही राज्य का विकास होता है।” ~ आचार्य चाणक्य
  • “भविष्य के अन्धकार में छिपे कार्य के लिए श्रेष्ठ मंत्रणा दीपक के समान प्रकाश देने वाली है।” ~ आचार्य चाणक्य
  • “मंत्रणा के समय कर्तव्य पालन में कभी ईर्ष्या नहीं करनी चाहिए।” ~ आचार्य चाणक्य
  • “मंत्रणा रूप आँखों से शत्रु के छिद्रों अर्थात उसकी कमजोरियों को देखा-परखा जाता है।” ~ आचार्य चाणक्य
  • “राजा, गुप्तचर और मंत्री तीनों का एक मत होना किसी भी मंत्रणा की सफलता है।” ~ आचार्य चाणक्य
  • “कार्य-अकार्य के तत्व दर्शी ही मंत्री होने चाहिए।” ~ आचार्य चाणक्य
Best quotes in hindi by Acharya Chanakya
  • “छः कानों में पड़ने से (तीसरे व्यक्ति को पता पड़ने से) मंत्रणा का भेद खुल जाता है।” ~ आचार्य चाणक्य
  • “अप्राप्त लाभ आदि राज्यतंत्र के चार आधार हैं।” ~ आचार्य चाणक्य
  • “आलसी राजा अप्राप्त लाभ को प्राप्त नहीं करता।” ~ आचार्य चाणक्य
  • “शक्तिशाली राजा लाभ को प्राप्त करने का प्रयत्न करता है।” ~ आचार्य चाणक्य
  • “राज्यतंत्र को ही नीतिशास्त्र कहते हैं।” ~ आचार्य चाणक्य
  • “राजतंत्र से संबंधित घरेलू और बाह्य, दोनों कर्तव्यों को राजतंत्र का अंग कहा जाता है।” ~ आचार्य चाणक्य
  • “राजनीति का संबंध केवल अपने राज्य को समृद्धि प्रदान करने वाले मामलों से होता है।” ~ आचार्य चाणक्य
    “ईर्ष्या करने वाले दो समान व्यक्तियों में विरोध पैदा कर देना चाहिए।” ~ आचार्य चाणक्य
  • “चतुरंगणी सेना (हाथी, घोड़े, रथ और पैदल) होने पर भी इन्द्रियों के वश में रहने वाला राजा नष्ट हो जाता है।” ~ आचार्य चाणक्य
  • “जुए में लिप्त रहने वाले के कार्य पूरे नहीं होते हैं।” ~ आचार्य चाणक्य
best thought in hindi
  • “कामी पुरुष कोई कार्य नहीं कर सकता।” ~ आचार्य चाणक्य
  • “पूर्वाग्रह से ग्रसित दंड देना लोक निंदा का कारण बनता है।” ~ आचार्य चाणक्य
  • “धन का लालची श्रीविहीन हो जाता है।” ~ आचार्य चाणक्य
  • “दंड से सम्पदा का आयोजन होता है।” ~ आचार्य चाणक्य
  • “दंड का भय ना होने से लोग अकार्य करने लगते हैं।” ~ आचार्य चाणक्य
  • “दण्डनीति से आत्मरक्षा की जा सकती है।” ~ आचार्य चाणक्य
  • “आत्मरक्षा से सबकी रक्षा होती है।” ~ आचार्य चाणक्य
  • “कार्य करने वाले के लिए उपाय सहायक होता है।” ~ आचार्य चाणक्य
  • “कार्य का स्वरुप निर्धारित हो जाने के बाद वह कार्य लक्ष्य बन जाता है।” ~ आचार्य चाणक्य
  • “अस्थिर मन वाले की सोच स्थिर नहीं रहती।” ~ आचार्य चाणक्य

positive thoughts in hindi

  • “कार्य के मध्य में अति विलम्ब और आलस्य उचित नहीं है।” ~ आचार्य चाणक्य
  • “कार्य-सिद्धि के लिए हस्त-कौशल का उपयोग करना चाहिए।” ~ आचार्य चाणक्य
  • “अशुभ कार्यों को नहीं करना चाहिए।” ~ आचार्य चाणक्य
  • “समय को समझने वाला कार्य सिद्ध करता है।” ~ आचार्य चाणक्य
  • “समय का ज्ञान ना रखने वाले राजा का कर्म समय के द्वारा ही नष्ट हो जाता है।” ~ आचार्य चाणक्य
  • “नीतिवान पुरुष कार्य प्रारम्भ करने से पूर्व ही देश-काल की परीक्षा कर लेते हैं।” ~ आचार्य चाणक्य
  • “परीक्षा करने से लक्ष्मी स्थिर रहती है।” ~ आचार्य चाणक्य
  • “मूर्ख लोग कार्यों के मध्य कठिनाई उत्पन्न होने पर दोष ही निकाला करते हैं।” ~ आचार्य चाणक्य
  • “कार्य की सिद्धि के लिए उदारता नहीं बरतनी चाहिए।” ~ आचार्य चाणक्य

suvichar hindi

  • “दूध पीने के लिए गाय का बछड़ा अपनी माँ के थनों पर प्रहार करता है।” ~ आचार्य चाणक्य
  • “जिन्हें भाग्य पर विश्वास नहीं होता, उनके कार्य पुरे नहीं होते।” ~ आचार्य चाणक्य
  • “प्रयत्न ना करने से कार्य में विघ्न पड़ता है।” ~ आचार्य चाणक्य
  • “जो अपने कर्तव्यों से बचते हैं, वे अपने आश्रितों परिजनों का भरण-पोषण नहीं कर पाते।” ~ आचार्य चाणक्य
  • “जो अपने कर्म को नहीं पहचानता, वह अंधा है।” ~ आचार्य चाणक्य
  • “प्रत्यक्ष और परोक्ष साधनों के अनुमान से कार्य की परीक्षा करें।” ~ आचार्य चाणक्य
  • “निम्न अनुष्ठानों (भूमि, धन-व्यापारउधोग-धंधों) से आय के साधन भी बढ़ते हैं।” ~ आचार्य चाणक्य
  • “विचार ना करके कार्य करने वाले व्यक्ति को लक्ष्मी त्याग देती है।” ~ आचार्य चाणक्य

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